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पश्चिम एशिया संकट और भारत की गैस सुरक्षा: LNG व LPG आयात निर्भरता की चुनौती

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✍️हाल के समय में पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इस क्षेत्र में होने वाले संघर्ष का प्रभाव विशेष रूप से उन देशों पर अधिक पड़ता है जो ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं। भारत भी ऐसा ही एक देश है, जहाँ प्राकृतिक गैस और LPG की बड़ी मात्रा आयात के माध्यम से प्राप्त होती है।

Credit - दैनिक भास्कर

 


🟠पश्चिम एशिया संकट के कारण समुद्री व्यापार मार्गों में असुरक्षा उत्पन्न हो गई है, जिससे गैस आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। इस स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने गैस वितरण को नियंत्रित करने तथा आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से Essential Commodities Act, 1955 के अंतर्गत आपात कदम उठाए हैं।


🟠वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में पश्चिम एशिया का महत्व
पश्चिम एशिया विश्व का एक प्रमुख ऊर्जा उत्पादक क्षेत्र है। इस क्षेत्र से निकलने वाला तेल और गैस समुद्री मार्गों के माध्यम से विभिन्न देशों तक पहुँचता है। इन मार्गों में सबसे महत्वपूर्ण है Strait of Hormuz, जो ईरान और ओमान के बीच स्थित एक संकीर्ण जलडमरूमध्य है।
यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार का एक महत्वपूर्ण chokepoint माना जाता है। विश्व के कुल तेल और गैस व्यापार का लगभग पाँचवाँ हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। भारत के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के LNG और LPG आयात का बड़ा भाग इसी रास्ते से आता है। यदि इस मार्ग में किसी प्रकार का व्यवधान उत्पन्न होता है तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव पड़ सकता है।


✒️भारत की गैस और LPG पर बढ़ती निर्भरता
भारत की अर्थव्यवस्था के विकास के साथ-साथ ऊर्जा की मांग भी लगातार बढ़ रही है। प्राकृतिक गैस को अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है, इसलिए उद्योग, बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण तथा घरेलू उपयोग में इसका महत्व तेजी से बढ़ा है।
 

 

✒️भारत की गैस मांग से संबंधित कुछ प्रमुख तथ्य इस प्रकार हैं:
 

🟠देश की कुल गैस मांग लगभग 190 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (mscmd) है।
इस मांग का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा LNG आयात से पूरा किया जाता है।
भारत की LPG आवश्यकता का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात पर निर्भर है।
LPG आयात का अधिकांश भाग पश्चिम एशिया के देशों से आता है।
 

🟠भारत के प्रमुख गैस आपूर्तिकर्ता देशों में Qatar, United Arab Emirates और Kuwait शामिल हैं। इन देशों से आने वाली गैस का बड़ा हिस्सा Strait of Hormuz के माध्यम से भारत पहुँचता है।
 

✒️भारत में LPG उपयोग में वृद्धि -

🟠पिछले एक दशक में भारत में LPG उपभोक्ताओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाएँ हैं। विशेष रूप से Pradhan Mantri Ujjwala Yojana के माध्यम से लाखों गरीब परिवारों को LPG कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं।
 

✒️आँकड़ों के अनुसार:
◾वर्ष 2015 में भारत में लगभग 1,486 लाख LPG उपभोक्ता थे।
◾वर्ष 2025 तक यह संख्या बढ़कर 3,300 लाख से अधिक हो गई है।
◾यह लगभग 120 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। 

🟠हालांकि LPG की बढ़ती मांग के कारण भारत की आयात निर्भरता भी बढ़ी है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियाँ सामने आई हैं।
 

🟠पश्चिम एशिया संघर्ष का ऊर्जा आपूर्ति पर प्रभाव
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और तनाव ने ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है। समुद्री मार्गों में असुरक्षा और जहाजों पर हमलों की घटनाओं के कारण LNG और LPG की आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।
 

✒️इस स्थिति के कुछ प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:-
 

◾LNG और LPG की कीमतों में वृद्धि
◾आयात लागत में बढ़ोतरी
◾घरेलू बाजार में आपूर्ति का दबाव
◾उद्योगों और बिजली उत्पादन पर संभावित प्रभाव
 

इन परिस्थितियों में भारत सरकार को ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए तत्काल कदम उठाने पड़े हैं।
 


✒️गैस संकट से निपटने के लिए सरकार के कदम-
 

1. गैस वितरण की प्राथमिकता व्यवस्था-


सरकार ने गैस वितरण को चार प्राथमिक श्रेणियों में विभाजित किया है ताकि सीमित संसाधनों का उपयोग सबसे आवश्यक क्षेत्रों में किया जा सके।
 

🟠प्रथम श्रेणी (100 प्रतिशत आपूर्ति)


◾घरेलू पाइप्ड नैचुरल गैस
◾परिवहन क्षेत्र के लिए CNG
◾LPG उत्पादन
◾गैस पाइपलाइन संचालन
 

🟠द्वितीय श्रेणी (लगभग 70 प्रतिशत आपूर्ति)
 

◾उर्वरक उद्योग
 

🟠तृतीय श्रेणी (लगभग 80 प्रतिशत आपूर्ति)
 

◾चाय उद्योग
◾अन्य विनिर्माण उद्योग
 

🟠चतुर्थ श्रेणी (लगभग 80 प्रतिशत आपूर्ति)
◾सिटी गैस वितरण नेटवर्क से जुड़े व्यावसायिक उपभोक्ता


इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गैस संकट का सबसे कम प्रभाव आम नागरिकों और कृषि क्षेत्र पर पड़े।


2. गैर-प्राथमिक क्षेत्रों में गैस कटौती-


प्राथमिक क्षेत्रों को पर्याप्त गैस उपलब्ध कराने के लिए कुछ उद्योगों में गैस आपूर्ति कम कर दी गई है। इनमें पेट्रोकेमिकल उद्योग, गैस आधारित बिजली संयंत्र और कुछ रिफाइनरियाँ शामिल हैं।


सरकारी कंपनी GAIL को गैस आवंटन और वितरण का प्रबंधन सौंपा गया है।


3. घरेलू LPG उत्पादन बढ़ाने के प्रयास-


सरकार ने रिफाइनरियों को LPG उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। प्रोपेन और ब्यूटेन के अधिक उपयोग के माध्यम से उत्पादन में लगभग 10 प्रतिशत वृद्धि की गई है।


निजी क्षेत्र की कंपनी Reliance Industries Limited ने भी अपने जामनगर रिफाइनरी परिसर में LPG उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की है।


4. घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता-


भारत में लगभग 33 करोड़ LPG उपभोक्ता हैं, इसलिए घरेलू गैस आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।


🟠सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम:-
◾घरेलू LPG को वाणिज्यिक उपयोग से प्राथमिकता
◾सिलेंडर बुकिंग अंतराल को 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन करना
◾प्रतिदिन लगभग 60 लाख LPG सिलेंडरों की आपूर्ति बनाए रखना
 

 ✒️प्रमुख चुनौतियाँ-


पश्चिम एशिया संकट ने भारत की ऊर्जा व्यवस्था की कई कमजोरियों को उजागर किया है:
 

◾पश्चिम एशिया पर अत्यधिक आयात निर्भरता
◾Strait of Hormuz जैसे समुद्री chokepoints पर निर्भरता
◾घरेलू गैस उत्पादन की सीमित क्षमता
◾उद्योगों पर गैस कटौती का आर्थिक प्रभाव
◾वैश्विक ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता
 

✒️आगे की रणनीति (Way Forward)-
 

भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति अपनानी होगी। इसके अंतर्गत निम्नलिखित उपाय महत्वपूर्ण हो सकते हैं:
 

◾LNG आयात स्रोतों का विविधीकरण
◾गहरे समुद्री क्षेत्रों में गैस अन्वेषण को बढ़ावा
रणनीतिक गैस भंडार का निर्माण
◾सौर, पवन और हरित हाइड्रोजन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार
◾ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देना
 

✒️निष्कर्ष-
 

पश्चिम एशिया संकट ने स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला अत्यंत संवेदनशील और भू-राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित होती है। भारत की LNG और LPG आयात निर्भरता इस जोखिम को और बढ़ा देती है। इसलिए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत को आयात विविधीकरण, घरेलू उत्पादन वृद्धि तथा स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के विकास पर विशेष ध्यान देना होगा।

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